सरस्वती विद्या मंदिर CBSE दुपाड़ा मार्ग शाजापुर पर विद्याभारती की योजनानुसार शाजापुर में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम संपन्न हुआ । कार्यक्रम में प्रांत द्वारा मुख्य वक्ता डॉ पिंकी हार्डिया , विशेष अतिथि श्रीमती शकुंतला सोनी ,अध्यक्षता श्रीमती बिंदु ठोमरे ,एवं कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती लीना भट्ट मंचासीन रहे ।
कार्यक्रम में 200 माताओं कि सहभागिता रही |
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ । कार्यक्रम की भूमिका एवं परिचय वरिष्ठ दीदी श्रीमती रचना बहल द्वारा किया गया । प्रस्तावना में कार्यक्रम संयोजिका लीना भट्ट द्वारा नारी के विभिन्न रूपों लक्ष्मी सरस्वती काली अन्नपूर्णा के संदर्भ में नारी को समाज की आधारशिला बताया ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती पिंकी हार्डिया ने कुटुंब प्रबोधन विषय पर अपने वक्तव्य में गीता में वर्णित नारी के सप्तगुण कीर्ति, श्री, वाक, स्मृति, मेधा, धृति, क्षमा गुण कि व्याख्या करते हुए कहा कि नारी समाज कि आधारशिला है प्राचीनकाल में नारी ने गुरु के पद को भी शुशोभित किया है वर्तमान में इन सात गुणों को जीवन में उतारकर नारी द्वारा समाज कि दशा एवं दिशा दोनों बदलकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण नारी द्वारा संभव है| पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में नव चेतना का संचार संभव है । मातृभाषा से बच्चों की बौद्धिक क्षमता का विकास होता है ।
भारत के विकास में महिलाओ कि भूमिका विषय पर अपने विचार रखते हुए भारत कि महान नारियो के प्रेरणादायी कार्यो का उल्लेख किया एवं देवी अहिल्याबाई की न्याय प्रियता , रानी लक्ष्मीबाई के शोर्य एवं सावित्री बाई फुले के शिक्षा संघर्ष को सभी के समक्ष रखा|
कार्यक्रम में शाजापुर शहर कि सामान्य जानकारी एवं अन्य विषयों पर रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई जिसमे सही जवाब देने वाली माताओं को मंच से पुरस्कार दिया गया |कार्यक्रम के मध्य में वाली ,एवं भारत कि महान नारी देवी अहिल्याबाई रानी लक्ष्मीबाई , किरण बेदी एवं कल्पना चावला के सन्देश वेशभूषा के साथ प्रतिरूप दर्शन बहिनों के द्वारा एकल अभिनय के माध्यम से किया गया | बहिनों द्वारा मनमोहक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा
संयुक्त परिवार के लिए श्रीमती मीना कुंभकार को एवं वीर प्रसूता श्रीमती गीता देवी पाठक को समाज सेवा हेतु श्रीमती सरिता शर्मा का मंच से सम्मान किया गया |
अध्यक्षीय उद्बोद्धन श्रीमती बिंदु ठोमरे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से राष्ट्र का विकास संभव है । प्लास्टिक मुक्त भारत की अवधारणा को सबके सामने रखा साथ वेस्ट से बेस्ट की गतिविधि करवाई गई । सेकार्यक्रम में अनुभव कथन श्रीमती सरिता चौहान द्वारा दिया गए| भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव एवं सप्त गुणों के विकास का संकल्प संयोजिका श्रीमती लीनाभट्ट द्वारा दिलवाया गया | संचालन श्रीमती सरिता बैरागी ने किया आभार सुश्री रश्मि जोशी ने माना ।
