शाजापुर। आसमान से बरसी आफत और उस पर बीमा कंपनियों की मनमानी से अन्नदाताओं के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले तहसील इकाई शाजापुर का कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर आक्रोशित किसानों ने नारेबाजी करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को जमकर कोसा। किसानों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि उनके हकों पर इसी तरह डाका डाला जाता रहा, तो आने वाले समय में राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का गांवों में घुसना पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। धरना स्थल पर किसानों का सबसे ज्यादा गुस्सा फसल बीमा कंपनियों की विसंगतियों और उनकी सर्वे नीतियों को लेकर दिखा। किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि खेतों का रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट सर्वे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री मुकेश पाटीदार ने बताया कि भारतीय किसान संघ सरकार से मांग करती है कि वर्ष 2025 की खरीफ फसल कटाई प्रयोग और 60 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट को ही मुख्य आधार माना जाए। इसी रिपोर्ट को आधार मानकर 100 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया जाए और संपूर्ण जिले के प्रत्येक गांव में किसानों के खातों में बीमा राशि डाली जाए। बीमा कंपनियों की मनमानी पर तुरंत लगाम लगाई जाए, अन्यथा पूरे जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कड़ा बहिष्कार किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट के महाघेराव की चेतावनी
सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए किसानों ने प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दिया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिला, तो यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। आने वाले समय में हजारों किसान कलेक्टर कार्यालय का महाघेराव करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के दौरान कोषाध्यक्ष ललित नागर, प्रचार प्रमुख भारत नाहर, तहसील अध्यक्ष सत्यनारायण पाटीदार, तहसील मंत्री ज्ञान सिंह गुर्जर, गजराजसिंह राजपूत, दिलीप प्रजापत, जितेंद्र पाटीदार, विक्रम सिंह गुर्जर, मोहन आचार्य, धनसिंह सिरोलिया, पप्पू नागर, अरुण मोरटा, मुकेश मोरटा, ओंकार सिंह लोरवास, तोलाराम गुर्जर, बहादुर सिंह राजपूत, रमेश चंद्र शर्मा, अनिल बलडिया, संजय गडोली, अनिल सेठ, जितेन गुर्जर, मोहित पाटीदार, अमृत पाटीदार, दिलीप सेठ, अनिल नागर, विनोद सेठ, रामस्वरूप, रामसिंह धोरया और हिंदूूसिंह पटेल बल्डया गुर्जर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।