जिनके कंधों पर है भविष्य संवारने का जिम्मा, उन्होंने निकाली अपने ही भविष्य की ‘अर्थी’
सरकार की वादाखिलाफी से शाजापुर में उबला अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, 5 सितंबर तक मांगें न मानने पर भोपाल में महाआंदोलन की चेतावनी
शाजापुर। जिन हाथों में नौनिहालों का भविष्य संवारने की कलम होनी चाहिए, वे हाथ आज अपने ही भविष्य की ‘अर्थी’ उठाने को मजबूर हैं। 18 सालों के लंबे शोषण और राज्य सरकार की लगातार वादाखिलाफी से आहत शाजापुर जिले के हजारों अतिथि शिक्षकों का आक्रोश रविवार को सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी मांगों और अधूरी सरकारी घोषणाओं की याद दिलाने के लिए शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर ‘स्वयं की अर्थी यात्रा’ निकाली। इस मार्मिक और उग्र प्रदर्शन ने पूरे शहर और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है।
रविवार को आयोजित इस अनोखे विरोध प्रदर्शन में जिले भर से हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षक शामिल हुए। सड़कों पर जब शिक्षकों की यह ‘अर्थी यात्रा’ गुजरी, तो हर कोई हैरान रह गया। शिक्षकों का आरोप है कि पिछले करीब दो दशकों से वे नाममात्र के वेतन पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने समय-समय पर पंचायत बुलाकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं और वादे तो किए, लेकिन उन्हें आज तक धरातल पर नहीं उतारा गया। कोरे आश्वासनों ने उनके भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है, जिसके चलते उन्हें अब अपने सम्मान के लिए यह कदम उठाना पड़ा।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं शिक्षक
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार से तुरंत आदेश जारी करने की मांग की। उनकी मुख्य मांगें हैं कि अतिथि शिक्षकों की विभागीय परीक्षा आयोजित कर उन्हें नियमित किया जाए, सेवाकाल को बढ़ाकर पूरे 12 महीने किया जाए और वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए, शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अतिथि शिक्षकों को उनके सेवा अनुभव के आधार पर बोनस अंक प्रदान किए जाएं।
शिक्षक दिवस से पहले चाहिए आदेश, वरना भोपाल में होगा महाआंदोलन
अतिथि शिक्षक संघ ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिक्षक दिवस 5 सितंबर से पहले उनकी मांगों के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी नहीं होते हैं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। संघ का कहना है कि 5 सितंबर के बाद पूरे प्रदेश के अतिथि शिक्षक राजधानी भोपाल में डेरा डालेंगे और वहां एक उग्र ‘महाआंदोलन’ किया जाएगा। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि अगर हालात बिगड़ते हैं और आंदोलन उग्र होता है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगा।