शाजापुर। बचपन को शादी की बेड़ियों में जकड़ने वाली बाल विवाह की सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ शाजापुर जिले के ग्राम बापचा से एक मजबूत आवाज उठी। इस गांव ने अब बाल विवाह को जड़ से खत्म करने की ठान ली है। इसी कड़ी में आयोजित एक विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम में पहुंचे क्षेत्रीय विधायक अरुण भीमावद की मौजूदगी में पूरे गांव ने एक सुर में संकल्प लिया कि वे न तो बाल विवाह होने देंगे और न ही ऐसी किसी गतिविधि का हिस्सा बनेंगे। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए विधायक अरुण भीमावद ने इस कुप्रथा के गंभीर परिणामों पर विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाल विवाह महज एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि यह मासूमों के भविष्य और उनके अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है। कच्ची उम्र में शादी के बंधन में बंधने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पूरी तरह बाधित हो जाता है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास पूरी तरह सतर्क रहें और जहां भी ऐसी घटना की भनक लगे, उसे रोकने के लिए बिना डरे आगे आएं।
तीन साल से चल रही है मुहिम
इस कार्यक्रम का आयोजन जेआरसी की सहयोगी संस्था ‘विदिशा सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन’ (VSWO) द्वारा किया गया। गौरतलब है कि यह संस्था पिछले तीन वर्षों से शाजापुर जिले के विभिन्न गांवों में जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के साथ मिलकर बाल संरक्षण और बाल विवाह मुक्त समाज की स्थापना के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है।
एक स्वर में ली गई सामूहिक शपथ
आयोजन का समापन बेहद सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ। उपस्थित ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे किसी भी सूरत में बाल विवाह का समर्थन नहीं करेंगे। इस दौरान “बच्चों को दें शिक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार, मिलकर करें बाल विवाह का पूरी तरह बहिष्कार” के नारे से पूरा परिसर गूंज उठा। ग्रामीण स्तर पर उठी यह पहल अब जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन रही है।