अबरार अहमद काशिफ की नज़्म ‘खुदा का सवाल’ ने श्रोताओं में भर दिया जोश
शाजापुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की शान, उनके बेमिसाल व्यक्तित्व और दुनिया को दिए गए अमन व इंसानियत के पैगाम को समर्पित एक भव्य नातिया मुशायरा शाजापुर में पूरी अकीदत और शानो-शौकत के साथ संपन्न हुआ। सीरत कमेटी शाजापुर के तत्वावधान में आयोजित इस रूहानी महफि़ल में देशभर से आए मशहूर शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर समां बांध दिया। शुक्रवार रात 10 बजे उर्दू मैदान, किला घाटी के पास सजी इस महफि़ल-ए-अदब में अकीदतमंदों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। कार्यक्रम सीरत कमेटी के सद्र हाजी नईम कुरैशी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। जिसकी सदारत इमरान खरखरे ने की। सैकड़ों लोग देर रात तक कलाम सुनने के लिए मौजूद रहे और रात 2 बजे तक भी श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। हर एक शेर पर ‘सुभानअल्लाह’ की सदाएं गूंजती रहीं। शायरों ने अपने कलाम के जरिए नबी-ए-पाक की शान का बखान किया और उनके बताए गए नेकी के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया।
अबरार काशिफ की नज़्म ने दिलों में जगाया रूहानी जोश
मुशायरे के मुख्य आकर्षण महाराष्ट्र के अकोला से तशरीफ लाए सुप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय शायर अबरार अहमद काशिफ रहे। जब उन्होंने अपनी मशहूर और संजीदा नज़्म ‘खुदा का सवाल’ अपने खास अंदाज़ में पढऩी शुरू कि तो पूरे मजमे में एक रूहानी जोश छा गया। इंसान को अल्लाह की नेमतों का अहसास कराती इस नज़्म के अश्आर ने सीधे श्रोताओं के दिलों पर दस्तक दी।
ये सर्दी ये गर्मी ये बारिश ये धूप
ये चेहरा ये क़द और ये रंग-रूप
दरिंदों चरिन्दों पे क़ाबू दिया
तुझे भाई दे कर के बाज़ू दिया
बहन दी तुझे और शरीक-ए-सफऱ
ये रिश्ते ये नाते घराना ये घर
कि औलाद भी दी, दिए वालदैन
अलिफ़ लाम मीम काफ़ और ऐन ग़ैन
ये अक़्ल-ओ-ज़हानत शुऊर-ओ-नजऱ
ये बस्ती ये सहरा ये ख़ुश्की ये तर
और इस पर किताब-ए-हिदायत भी दी
नबी भी उतारे शरीअत भी दी
गरज़़ कि सभी कुछ है तेरे लिए
बता क्या किया तू ने मेरे लिए।
इन पंक्तियों को सुनकर वहां मौजूद हर शख्स का दिल अल्लाह की बारगाह में झुक गया और दाद व तहसीन से पूरा मैदान गूंज उठा।
मशहूर शायरों ने भी पैश किये अपने कलाम
इस पाक महफि़ल में सिर्फ काशिफ साहब ही नहीं, बल्कि अवाम को कई और बेहतरीन कलमकारों को सुनने का मौका मिला। बुरहानपुर से आए डॉ. जलील बुरहानपुरी, उज्जैन के रईस निजामी और रतलाम के अय्यूब आसिम साहब ने भी अपनी बेहतरीन नात-ए-पाक से माहौल को मुअत्तर कर दिया। इनके अलावा मुकामी शायरों में शाजापुर के मशहूर शायर सैयद साजिद अली ‘मशहूर शाजापुरी’, और हनीफ राही साहब और देवास के सैयद गुलरेज अली ने भी अपने उम्दा कलाम पेश कर भरपूर दाद बटोरीं। देर रात तक चले इस नातिया मुशायरे ने शाजापुर की फिजाओं में अमन, मोहब्बत और इबादत का ऐसा रंग घोला, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। यह जानकारी सीरत कमेटी मीडिया प्रभारी अनीस खान ने दी।
सम्माननीय, ब्यूरोचीफ
सादर प्रकाशनार्थ
हाजी नईम कुरैशी,
सदर सीरत कमेटी शाजापुर