शाजापुर। शहर के लालघाटी थाना क्षेत्र में हुई पुलिस कार्रवाई का खुलासा हो गया है। यह कार्रवाई राज्य साइबर सेल की टीम ने डीएसपी नीला मारोठ के नेतृत्व में की। यहां एडवाइजरी के नाम पर धोखाधड़ी का एक बड़ा केंद्र चलाया जा रहा था। पुलिस ने यहां काम करने वाले कुल 19 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें 13 युवतियाँ और 6 युवक शामिल हैं।
कार्रवाई का नेतृत्व कर रही डीएसपी लीना मारोठ ने बताया कि पूरे मामले की जांच जारी है। यह कार्रवाई एक मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। हैरानी की बात यह है कि शहर में इतनी बड़ी धोखाधड़ी हो रही थी और स्थानीय पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। राज्य साइबर सेल की टीम ने मौके पर पहुंचकर बड़ी कार्रवाई अंजाम दी।
इसे आसान भाषा में समझें:
📌 एडवाइजरी धोखाधड़ी क्या होती है?
ऐसी ठगी जिसमें धोखेबाज़ खुद को सलाहकार, फाइनेंशियल एडवाइज़र, स्टॉक/क्रिप्टो एक्सपर्ट, लोन सलाहकार, जॉब कंसल्टेंट या सरकारी एडवाइजरी देने वाला अधिकारी बताकर लोगों को गलत जानकारी देते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं।
📌 इसमें आमतौर पर क्या किया जाता है?
- लोगों को फोन करके या ऑफिस बुलाकर कहा जाता है कि—
“हम आपको निवेश/नौकरी/लोन/बोनस/सरकारी लाभ दिला देंगे।” - इसके बदले “कंसल्टेंसी शुल्क”, “एडवाइजरी फीस” या “प्रोसेसिंग चार्ज” लिया जाता है।
- सलाह देने के नाम पर पैसे लेने के बाद उनका कोई काम नहीं किया जाता।
- कई बार फर्जी कॉल सेंटर या दफ्तर बनाकर यह काम किया जाता है ताकि असली लगे।
📌 शाजापुर वाले मामले में क्या हुआ?
यहां एक ऐसा “एडवाइजरी सेंटर” चल रहा था जहां लोग सलाह देने के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे थे। साइबर सेल ने छापेमारी कर 19 लोगों को पकड़ा है।
इसका मतलब—यह जगह असली सलाह केंद्र नहीं था, बल्कि नकली सलाह देकर लोगों से पैसे ठगने का अड्डा था।
यह केवल एक आॅनलाईन से जुड़ा मामला नहीं है, इसमें शेयर मार्केट के बड़े दलाल और नौसिख्यिे शामिल हो सकते हैं फिलहाल कार्यवाही जारी है
