अरनियाकलां तहसील में सट्टा का गोरखधंधा दिनों-दिन पैर पसारता जा रहा है। खुलेआम नियम-क़ानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और जिम्मेदार प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। ज़मीनी हकीकत ये है कि सट्टा के अवैध कारोबार ने पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
रात के अंधेरे में चल रही सट्टेबाज़ी, दिन में प्रशासन की चुप्पी
सूत्रों के अनुसार, सट्टा कारोबार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर रात्रि के समय गुप्त अड्डों पर लोग सट्टा खेलते पाए गए हैं। इतना ही नहीं, इस अवैध धंधे में क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके चलते कार्रवाई में बार-बार ढील दी जा रही है।
पुलिस पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को सब कुछ पता होते हुए भी कार्रवाई नहीं की जाती। “पुलिस बस खानापूर्ति करती है, लेकिन असली सटोरिये आज भी खुलेआम घूम रहे हैं,” एक नाराज़ ग्रामीण ने बताया।
निगम और प्रशासन की खामोशी पर सवाल
प्रशासन और नगर परिषद की निष्क्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं। एक ओर जहां सरकार ‘नशा मुक्त भारत’ और अपराध मुक्ति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर सट्टे जैसे अवैध धंधे पर लगाम नहीं लगाई जा रही।
युवा पीढ़ी पर बुरा असर
इस सट्टेबाज़ी के चलते युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोग लालच में फंसकर अपने घर तक बर्बाद कर बैठते हैं। “सट्टा केवल एक खेल नहीं, यह पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है,” एक सामाजिक कार्यकर्ता ने चिंता जताई।
अब क्या?
जनता की मांग है कि जिला प्रशासन और पुलिस तुरंत प्रभाव से सट्टा कारोबार पर रोक लगाए और दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करे। अगर प्रशासन इसी तरह मूकदर्शक बना रहा, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
