शाजापुर। इन दिनों शहर के यातायात की व्यवस्था कोरोना के समय हाॅस्पिटल में लगी मरीज़ों की बदहाली की तरह है। वर्तमान में यातायात महकमें की एक गाड़ी आवाज़ लगाकर टायरों पर लाॅक कर चालान तो बनाना जानती है पर मुख्य चैराहों पर पुलिसकर्मी यातायात को संभालने के बजाए समय काटते नज़र आ रहे हैं।
नई सड़क से लेकर बजाज खाना मार्ग, मीरकला से किलारोड़ और बड़ा चोक से सोमवारिया बाज़ार का ट्राफिक मुम्बई के व्यस्ततम मार्गो की होड़ करने में लगा है जहां इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी दिख भी जाते हैं तो यातायात पर यही कहते नज़र आते हैं कि क्या करें ? यानी अपना आप देखिए।
इससे अधिक कार्यवाही की बात कि जाए तो परशुराम चैराहा ए.बी.रोड़ पर चालानी कार्यवाही, हेलमेट की समझाईश करते कुछ पुलिसकर्मी नज़र आ जाऐंगे। वैसे भी शाजापुर को जुलूसपुर बनाने में सभी समाज का पूर्ण योगदान भी है जहां जुलूस की व्यवस्था के लिए पुलिस को लगा दिया जाता है और वहीं सारी व्यवस्थाऐं भी देखने को मिलती है।
दुकानदारो पर भी कार्यवाही हो जाए-
समय-समय पर त्यौहारी दौर में दुकानदारों के द्वारा अतिक्रमण पर कार्यवाही करता नगर पालिका अमला और पुलिस यदि चाहे तो सख्ती से दुकान के बाहर के बोर्ड, लटकाने वाला सामान और सड़क के डिस्प्ले पर रखे सामान को रखने से पूर्णतः प्रतिबंधित भी करवा सकती है, जिससे कुछ राहत वाहन चालकों को हो सकती है, पर रसूखादारों और छुट भैया नेतागिरी के कारण यह भी संभव होता नज़र नहीं आ रहा है।
स्कूल बसों का योगदान-
इस ट्राफिक को बढ़ाने में स्कूल बसों का खासा योगदान है लेकिन बच्चों की आढ़ लेकर मुख्य मार्ग से इन्हे निकलने से कोई रोक नहीं सकता हालाँकि, इनके लिए अन्यत्र मार्ग है पर यह उपयेाग में नहीं लेना चाहते। जैसे दुपाड़ा रोड़ से खाली गाड़ी पुलिस लाईन पर लाकर खड़ी की जा सकती है लेकिन बस स्टेण्ड से नई सड़क से लाकर खड़ी की जाती है।
अधिकारी क्यों बोलेंगे-
अधिकतर अधिकारी वार्ग शहर के बाहर यानी आदर्श काॅलोनी, ज्योतिनगर, लालघाटी जैसी जगहों पर रहते हैं जिन्हे सामान खरीदी के लिए ही शहर के अन्दर का रूख करना पड़ता है और जिला कलेक्टर हो या अनुविभागीय अधिकारी, इनका शहर के अन्दर रोज़ आने-जाने का कोई काम नहीं पड़ता इसलिए डीजे की आवाज़ हो या शहर का ट्राफिक इसका टेन्शन क्यों लेना।
अब सारा दारोमदार शहर की जनता पर ही है इसलिए शायद यातायात विभाग भी चाहता है कि जनता ही समझदार बनकर गाड़ीयां चलाना छोड़ दें। व्यवस्था तो होती रहेगी।
