कहते है कि कश्मीर घाटी की सुंदरता स्विट्जरलैंड से भी कई गुना ज़्यादा है । स्विट्जरलैंड को इंग्लिश प्रचार तंत्र ने ऐसा बखान किया कि जिसने स्विट्जरलैंड नहीं देखा गोया दुनिया में कुछ भी नहीं देखा ।
भारत प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर थोड़ा देर से चेता । लेकिन जब चेता तो यूरोपियन मुल्कों को लगा कि प्रकृति प्रदत्त कश्मीर घाटी के बेमिसाल सौंदर्य के आगे उनके तथाकथित सौंदर्य स्पॉट्स की चमक फीकी पड़ सकती है , लिहाजा धर्म के नाम अलग हुए पड़ोसी मुल्क को उकसाकर घाटी में नफरत का प्रायोजित खेल शुरू हुआ ।
आज़ादी के बाद की सरकारें कभी मजबूत तो कभी बैसाखी वाली रही और विविधता भरे पूरे हिंदुस्तान को पैरों पर खड़ा करने की कोशिशों में घाटी की समस्या को न तो ठीक से समझ पाई न ही उसका कारगर ईलाज कर पाई ।
आतंक का जवाब सख्ती और सेना के बल देने की तरकीब में देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा रक्षा तंत्र पर खर्च होने लगा जो कभी कभी राजनेताओं के भ्रष्टाचार का चारागाह भी बना । इसके कारण बहुत सी सरकारों को खासकर घाटी की स्थानीय सरकार को लगा कि आतंक की फसल से उनका वजूद है और पैसा भी है ।
पिछले ढाई दशक में छुटपुट हिंसा के बाद पहलगाम का यह दिल दहला देने देने वाला कृत्य हमे फिर से सोचने पर मजबूर करता हैं कि घाटी को आतंक से पूर्ण रूप से मुक्त करने की कवायद अभी खत्म नहीं हुई है ।
कश्मीर इस देश के सर का मुकुट है और हर भारतीय को इस ताज पर गर्व है , कश्मीर घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है अंग है जिसके बिना देश के वजूद की कल्पना नहीं की जा सकती है ।
पिछले एक दशक से मजबूत और राष्ट्रवादी चरित्र की सरकार आ जाने से कश्मीर घाटी की बहुत सारी समस्याएं न केवल जड़ से सुलझने लगी थी बल्कि सामान्य जन जीवन बहाल होने के साथ साथ पर्यटन भी पूरे शबाब पर आ चुका था ।
घाटी और देश के दुश्मनों को यही सब अखरता भी है और उनकी आंखों में चुभता भी है नतीजतन वे घाटी को वीरान और खंडहर करने की जुगत में पीठ पीछे लगे रहते है । दुर्भाग्य से वे कल पहलगाम में फिर कामयाब हो गए ।
कलमा पढ़वाना धर्म और नाम पूछकर गोली मारना ये भी देश में विघटन और अराजकता फैलाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है । देश में हिंदू मुस्लिम विरोध की खाई को और चौड़ा करने की कुटिल चाल है , इस्लाम का चोला ओढ़कर आतंकी अपने कुकृत्य को जस्टिफाई करने की कोशिश करते है । हर अमन पसंद नागरिक ने इस मानसिकता की मुखालिफत करना चाहिए यही राष्ट्रीय धर्म भी है और वक्त का तकाज़ा भी है ।
सरकार को भी चाहिए कि वो इस कायराना और निंदनीय हरकत की अकाउंटेबिलिटी फिक्स करे , सुरक्षा व्यवस्था की कमियों और खामियों की ईमानदार समीक्षा करे और कारगर जवाबी कार्यवाही करे । देश के हर नागरिक की जान कीमती है यह एहसास सरकारों को रहे और वे लाशों पर राजनीति करने के बजाय इस हिंसक तांडव को जड़ से हमेशा के लिए खत्म करे । आतंकी देश पर और यहां के नागरिकों पर बुरी नज़र आईंदा न रख सके उनके दिल और दिमाग़ में ऐसा भय सरकार अपने आगामी एक्शन से पैदा करे ।
हर भारतीय से विनम्र निवेदन है कि यह वक्त हिन्दू मुस्लिम करने का नहीं है बल्कि आतंक को जड़ से मिटाने के लिए एकजुटता प्रदर्शित करने का है । हमारी एकता उनकी हार है जबकि हमारा हिंदू मुस्लिम होना उनकी जीत है ।
जिंदगी के कुछ पल सुकून से बिताने गए परिवारों के साथ हुए हादसे से मेरे जैसा हर भारतीय आहत है क्षुब्ध है दुःखी है । हमारी सद्भावनाएं कायराना हादसे में मृतक हुए परिवारों के शेष सदस्यों के साथ है । आशा है कि यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और इस महान राष्ट्र की वर्तमान सरकार इस बर्बर कार्यवाही का मुंह तोड़ जवाब देगी ।
मुफज्जल हुसैन…..✍️
